HomeNewsमानव एकता दिवसः सेवा और आध्यात्मिक समरसता का पावन अवसर

मानव एकता दिवसः सेवा और आध्यात्मिक समरसता का पावन अवसर

नई दिल्ली, 17 अप्रैल (नितिन मनोचा): संत निरंकारी मिशन द्वारा बाबा गुरबचन सिंह जी की पावन स्मृति में ‘मानव एकता दिवस’ का आयोजन 24 अप्रैल 2026 को श्रद्धा, समर्पण और प्रेमपूर्ण वातावरण में किया जाएगा। यह आयोजन मानवता में एकता, सेवा और सार्वभौमिक भाईचारे का संदेश देने के उद्देश्य से हर वर्ष आयोजित किया जाता है।

इस अवसर पर सतगुरु माता सुदीक्षा जी महाराज एवं निरंकारी राजपिता रमित जी के सान्निध्य में दिल्ली के बुराड़ी स्थित ग्राउंड नं. 2 (सरोवर के सामने) एक भव्य सत्संग का आयोजन होगा। इस सत्संग में देश-विदेश से आए श्रद्धालु भक्त शामिल होकर आध्यात्मिक शांति, भक्ति और एकत्व का अनुभव करेंगे।

सिर्फ दिल्ली ही नहीं, बल्कि देश-विदेश की विभिन्न शाखाओं में भी इस दिन विशेष सत्संग आयोजित किए जाएंगे, जहां श्रद्धालु प्रेम, शांति और भाईचारे के संदेश को आत्मसात करेंगे। यह आयोजन केवल एक धार्मिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि आत्मिक जागरूकता और मानवता के उत्थान का प्रतीक है।

यह दिवस बाबा गुरबचन सिंह जी और चाचा प्रताप सिंह जी की स्मृति को समर्पित है, जिन्होंने अपने जीवन में निःस्वार्थ सेवा, त्याग और समर्पण की मिसाल कायम की। उनके आदर्श आज भी लोगों को प्रेम, विनम्रता और सेवा के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देते हैं।

इस मौके पर मुख्य आयोजन स्थल पर सुबह 8 बजे से दोपहर 2 बजे तक रक्तदान शिविर का भी आयोजन किया जाएगा। इस शिविर में विभिन्न अस्पतालों के विशेषज्ञ डॉक्टरों और इंडियन रेड क्रॉस सोसायटी की टीम द्वारा सेवाएं प्रदान की जाएंगी। हजारों श्रद्धालु इस सेवा कार्य में भाग लेकर मानव जीवन बचाने में योगदान देंगे।

संत निरंकारी मण्डल के सचिव जोगिन्दर सुखीजा के अनुसार, संत निरंकारी चैरिटेबल फाउंडेशन के मार्गदर्शन में आयोजित इन शिविरों में बड़ी संख्या में लोग स्वेच्छा से रक्तदान करते हैं। यह सेवा न केवल जरूरतमंदों के लिए जीवनदायी है, बल्कि दान करने वालों को भी आत्मिक संतोष प्रदान करती है।

उल्लेखनीय है कि संत निरंकारी मिशन पिछले चार दशकों से रक्तदान के क्षेत्र में अग्रणी भूमिका निभा रहा है। मुंबई स्थित मिशन का ब्लड बैंक निरंतर सेवा कार्यों में सक्रिय है और अब तक हजारों रक्तदान शिविरों के माध्यम से अनेक जीवनों को बचाया जा चुका है।

यह आयोजन सतगुरु माता सुदीक्षा जी महाराज की शिक्षाओं का सजीव उदाहरण है, जो मानवता में प्रेम, एकता और सह-अस्तित्व का संदेश देती हैं। ‘मानव एकता दिवस’ के माध्यम से समाज में सेवा और सद्भाव की भावना को और सुदृढ़ करने का प्रयास किया जा रहा है।

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