HomePunjabयुद्ध नहीं, अमन जरूरी: ‘युद्ध से अमन की ओर’ ने छुआ दिल

युद्ध नहीं, अमन जरूरी: ‘युद्ध से अमन की ओर’ ने छुआ दिल

रिपोर्टर: नरिंदर चावला

चंडीगढ़। देश की रक्षा के लिए सीमा पर तैनात सैनिकों की जिंदगी केवल बंदूक, युद्ध और चौकसी तक सीमित नहीं होती। उनके पीछे उनका परिवार, बच्चे, रिश्ते और भावनाएं भी जुड़ी होती हैं। सैनिकों के इसी मानवीय पक्ष और युद्ध की भयावहता को केंद्र में रखते हुए ‘युद्ध से अमन की ओर’ नाटक का मंचन रविवार को सेक्टर-18 स्थित टैगोर थिएटर में किया गया।

राजू वैद राज द्वारा लिखित इस नाटक का निर्देशन राजेश कुमार ने किया, जबकि समर्पण थिएटर ग्रुप के कलाकारों ने इसे मंच पर जीवंत किया। नाटक के माध्यम से कलाकारों ने यह संदेश देने का प्रयास किया कि युद्ध किसी समस्या का स्थायी समाधान नहीं है, बल्कि कई बार अपने साथ नई समस्याएं और मानवीय त्रासदियां लेकर आता है।

सीमा पर जागते हैं जवान, घरों में चैन से सोते हैं लोग

नाटक की कहानी में दिखाया गया कि जब आम लोग अपने घरों में चैन की नींद सो रहे होते हैं, तब सीमा पर तैनात जवान देश की सुरक्षा के लिए जाग रहे होते हैं। ऊंचाई वाले दुर्गम इलाकों में तैनाती के दौरान सैनिकों को मौसम, भोजन और रोजमर्रा की जरूरतों से जुड़ी अनेक चुनौतियों का सामना करना पड़ता है।

इसके बावजूद सैनिक अपने कर्तव्य से पीछे नहीं हटते और देश की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हैं। कहानी उस समय नया मोड़ लेती है, जब सैनिकों की चौकी पर हमला होता है।

हमले के बाद भारतीय सैनिक अपने साथियों को सुरक्षित निकालने के लिए आगे बढ़ते हैं। इसी दौरान वे एक दुश्मन सैनिक को हिरासत में लेकर आते हैं। यहीं से नाटक की कहानी केवल युद्ध और दुश्मनी तक सीमित न रहकर इंसानी रिश्तों और भावनाओं की ओर बढ़ती है।

दुश्मन सैनिक और उसके आठ साल के बेटे की कहानी ने किया भावुक

नाटक का सबसे भावुक और प्रभावशाली हिस्सा उस समय सामने आता है, जब हिरासत में लिया गया दुश्मन सैनिक अपने आठ साल के बेटे को याद करता है। वह अपने बच्चे को घर पर छोड़कर युद्ध के मैदान में आया है और उसके मन में लगातार यही चिंता बनी रहती है कि वह अपने बेटे से दोबारा मिल पाएगा या नहीं।

इस प्रसंग के जरिए नाटक ने यह सवाल दर्शकों के सामने रखा कि सीमा के दोनों ओर खड़े सैनिकों के बीच भले ही युद्ध हो, लेकिन उनके भीतर पिता, पुत्र, परिवार और रिश्तों की भावनाएं एक जैसी होती हैं।

जीत के साथ दिखाई दी शहादत की कीमत

नाटक के अंत में भारत की जीत होती है, लेकिन इस जीत के साथ शहादत की कीमत भी सामने आती है। कहानी दर्शकों को यह सोचने के लिए मजबूर करती है कि युद्ध में जीत और हार से आगे भी बहुत कुछ खोया जाता है।

‘युद्ध से अमन की ओर’ का मूल संदेश यही रहा कि मानवता, शांति और अमन की राह को प्राथमिकता मिलनी चाहिए और युद्ध को अंतिम विकल्प के रूप में भी देखने से पहले उसके मानवीय परिणामों को समझना जरूरी है।

सतनाम सिंह संधू और सुखविंदर कौर भी रहीं मौजूद

कार्यक्रम में राज्यसभा सांसद एवं चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी के चांसलर एस. सतनाम सिंह संधू मुख्य अतिथि के रूप में पहुंचे। वहीं चंडीगढ़ संगीत नाटक अकादमी की चेयरपर्सन सुखविंदर कौर गेस्ट ऑफ ऑनर के रूप में मौजूद रहीं।

अतिथियों ने नाटक की प्रस्तुति और कलाकारों के प्रयासों की सराहना की।

इन कलाकारों ने किया अभिनय

नाटक में राजीव, राजू वैद राज, जसवीर जस्सी, अर्शी बैस, रिक जैन, हार्दिक, मिथलेश और अनमोल सहित अन्य कलाकारों ने अभिनय किया। नाटक का संगीत संगीत परम चंदेल ने तैयार किया।

कलाकारों ने अपने अभिनय के माध्यम से सैनिकों के संघर्ष, परिवार से दूरी, युद्ध की परिस्थितियों और मानवीय भावनाओं को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया।

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