जंडियाला गुरु, अमृतसर | 16 अक्टूबर 2026 | रिपोर्ट: डॉ. गौरव कुमार
जंडियाला गुरु (पंजाब)। दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान की ओर से रघुनाथ डालियाणा मंदिर, जंडियाला गुरु में आयोजित ‘राम सुमिर में’ कार्यक्रम के अंतर्गत श्रीराम कथामृत का आयोजन किया गया। इस अवसर पर श्री आशुतोष महाराज जी की शिष्या साध्वी वीरेशा भारती जी ने केवट प्रसंग के माध्यम से प्रभु श्रीराम के प्रति निष्कपट प्रेम, अटूट विश्वास और निस्वार्थ भक्ति का संदेश दिया।
केवट प्रसंग से मिली निष्काम भक्ति की प्रेरणा
साध्वी वीरेशा भारती जी ने कहा कि श्रीराम कथा केवल भगवान श्रीराम के जीवन प्रसंगों का वर्णन नहीं है, बल्कि यह मानव जीवन को आदर्शों, मर्यादा, प्रेम और आध्यात्मिक ज्ञान से जोड़ने का माध्यम है। कथा के माध्यम से व्यक्ति को भक्ति, विनम्रता, सेवा और समर्पण जैसे गुण अपनाने की प्रेरणा मिलती है।
केवट प्रसंग का उल्लेख करते हुए उन्होंने बताया कि केवट के लिए प्रभु श्रीराम के चरणों की सेवा करना ही परम सौभाग्य था। उसकी भक्ति किसी सांसारिक स्वार्थ पर आधारित नहीं थी, बल्कि उसमें श्रद्धा, प्रेम और पूर्ण समर्पण की भावना थी। यह प्रसंग सिखाता है कि सच्ची भक्ति धन, पद या बाहरी दिखावे से नहीं, बल्कि हृदय की पवित्रता और निष्कपट भाव से प्रकट होती है।
ब्रह्मज्ञान से मजबूत होता है परमात्मा से संबंध
साध्वी जी ने कहा कि परमात्मा के प्रति प्रेम और विश्वास को दृढ़ बनाने के लिए उनके वास्तविक स्वरूप को जानना आवश्यक है। गोस्वामी तुलसीदास जी की चौपाई—
“जाने बिनु न होइ परतीति, बिनु परतीति होइ नहिं प्रीति।”
का उल्लेख करते हुए उन्होंने पूर्ण सतगुरु के मार्गदर्शन और ब्रह्मज्ञान की महत्ता समझाई। उन्होंने बताया कि आध्यात्मिक ज्ञान मनुष्य को परमात्मा के प्रत्यक्ष अनुभव की दिशा में प्रेरित करता है और उसकी भक्ति को गहरी अनुभूति से जोड़ता है।
प्रेम, सेवा और समर्पण अपनाने का आह्वान
दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान के संस्थापक एवं संचालक सर्व श्री आशुतोष महाराज जी के मार्गदर्शन में आध्यात्मिक ज्ञान के माध्यम से मानवता को परमात्मा के साक्षात्कार की दिशा में प्रेरित किया जा रहा है।
साध्वी जी ने संदेश दिया कि श्रीराम कथा का वास्तविक उद्देश्य तभी पूरा होता है, जब इसके आदर्शों को केवल सुना ही नहीं, बल्कि जीवन में भी अपनाया जाए। प्रभु श्रीराम के आदर्शों पर चलते हुए प्रेम, सेवा, विनम्रता और समर्पण से परिपूर्ण जीवन का निर्माण करना ही कथा का प्रमुख संदेश है।
कार्यक्रम के दौरान साध्वी नीरजा भारती, साध्वी कृष्णप्रीत भारती, श्री सुविंदर बबला, श्री साहिल शर्मा, श्री परगट सिंह, प्रवीण शर्मा, सुरिंदर सोनू (काउंसलर), पंडित रघुवीर, पंडित वीर सहित अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।




