HomeNational79वें निरंकारी संत समागम की तैयारियाँ अंतिम चरण में

79वें निरंकारी संत समागम की तैयारियाँ अंतिम चरण में

समालखा में 23 से 26 अक्टूबर तक होगा वार्षिक संत समागम, भव्य स्वागत द्वार और विशाल पंडाल बने आकर्षण

मोहाली, ठठी भाई , खन्ना, 18 अक्टूबर 2026 (नरिंदर चावला, गुरपाल सिंह , नितिन मनोचा)। सतगुरु माता सुदीक्षा जी महाराज एवं निरंकारी राजपिता रमित जी की पावन छत्रछाया में 79वां वार्षिक निरंकारी संत समागम 23 से 26 अक्टूबर 2026 तक संत निरंकारी आध्यात्मिक स्थल, समालखा में आयोजित होगा। समागम की तैयारियाँ अब अंतिम चरण में पहुँच चुकी हैं। देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं के स्वागत के लिए विशाल पंडालों, आधुनिक एलईडी स्क्रीन और अन्य आवश्यक सुविधाओं की व्यवस्थाएँ की जा रही हैं।

आध्यात्मिक नगरी के रूप में तैयार हो रहा समागम स्थल

समागम स्थल पर संतों और सेवादारों की निस्वार्थ सेवा, समर्पण एवं अथक परिश्रम से एक भव्य आध्यात्मिक नगरी का स्वरूप उभरकर सामने आया है। श्रद्धालुओं की सुविधा को ध्यान में रखते हुए विशाल पंडालों में बैठने की व्यवस्था की गई है। इसके साथ ही अत्याधुनिक एलईडी स्क्रीन स्थापित की जा रही हैं, ताकि परिसर के विभिन्न हिस्सों में बैठे श्रद्धालु सत्संग प्रवचनों, भजनों और आध्यात्मिक विचारों का लाभ उठा सकें।

समागम में आने वाले श्रद्धालुओं के सुचारु आवागमन और आवश्यक सुविधाओं को सुनिश्चित करने के लिए भी विशेष प्रबंध किए जा रहे हैं।

भव्य स्वागत द्वार बना आकर्षण का केंद्र

समागम स्थल पर श्रद्धालु भक्तों द्वारा तैयार किया गया मुख्य स्वागत द्वार विशेष आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। अपनी कलात्मकता और भव्य स्वरूप के कारण यह द्वार सेवा, समर्पण, सृजनशीलता और सामूहिक श्रद्धा का प्रतीक बनकर सामने आया है।

यह स्वागत द्वार समागम में आने वाले श्रद्धालुओं का प्रेम, अपनत्व और समभाव के साथ अभिनंदन करने का संदेश देता है। इसकी भव्यता आयोजन की आध्यात्मिक गरिमा को और अधिक आकर्षक बना रही है।

ब्रह्मज्ञान, प्रेम और सेवा का संदेश देगा समागम

79वां वार्षिक निरंकारी संत समागम केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि ब्रह्मज्ञान, भक्ति, प्रेम और आत्मिक जागृति का पावन अवसर है। इसका उद्देश्य मानव जीवन में प्रेम, विश्वबंधुत्व, आपसी सद्भाव और निस्वार्थ सेवा जैसे मूल्यों को मजबूत करने की प्रेरणा देना है।

समागम में श्रद्धालुओं को परमात्मा से जुड़ने, अपनी अंतर्चेतना को जागृत करने और मानवीय मूल्यों को दैनिक जीवन में अपनाने की प्रेरणा मिलेगी। आध्यात्मिक विचारों के माध्यम से यह संदेश दिया जाएगा कि वास्तविक शांति और जीवन की समृद्धि का अनुभव आंतरिक जागृति तथा प्रेमपूर्ण व्यवहार से होता है।

चार प्रमुख क्षेत्रों में विभाजित किया गया परिसर

संत निरंकारी मंडल के सचिव श्री जोगिंदर सुखीजा जी ने जानकारी साझा करते हुए बताया कि सतगुरु माता जी की दिव्य प्रेरणा एवं आशीर्वाद से समागम की तैयारियाँ व्यवस्थित रूप से आगे बढ़ रही हैं। श्रद्धालुओं को आवश्यक सुविधाएँ उपलब्ध कराने, सुचारु संचालन और सहज आवागमन सुनिश्चित करने के उद्देश्य से पूरे परिसर को चार प्रमुख क्षेत्रों में विभाजित किया गया है।

उन्होंने बताया कि सेवादारों की कर्मठता और निस्वार्थ सेवा भावना से समागम स्थल को सुंदर, सुव्यवस्थित और भव्य स्वरूप प्रदान किया जा रहा है, ताकि यहाँ आने वाले श्रद्धालु आध्यात्मिक वातावरण का अनुभव कर सकें।

श्रद्धालुओं के स्वागत के लिए तैयार समागम स्थल

23 से 26 अक्टूबर तक आयोजित होने वाला यह वार्षिक संत समागम श्रद्धालुओं के लिए प्रेम, भक्ति, सेवा और आत्मिक जागृति से जुड़ने का विशेष अवसर होगा। आयोजन के माध्यम से मानवता, सद्भाव और विश्वबंधुत्व का संदेश जन-जन तक पहुँचाने की भावना को साकार किया जाएगा।

समागम स्थल पर जारी तैयारियाँ इस भव्य आध्यात्मिक आयोजन के प्रति श्रद्धालुओं के उत्साह, सेवा भावना और समर्पण को दर्शाती हैं।

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