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79वां निरंकारी संत समागम: सेवा और समर्पण की सुगंध

चंडीगढ़/खन्ना/ठाठी भाई, 5 अक्टूबर 2026।
रिपोर्टर: नरिंदर चावला, नितिन मनोचा एवं गुरपाल सिंह

संत निरंकारी मिशन का 79वां वार्षिक संत समागम 23 से 26 अक्टूबर 2026 तक समालखा स्थित संत निरंकारी आध्यात्मिक स्थल पर आयोजित किया जाएगा। समागम सतगुरु माता सुदीक्षा जी महाराज एवं निरंकारी राजपिता रमित जी के पावन सान्निध्य में संपन्न होगा। इस वर्ष संत समागम का प्रेरणादायी विषय ‘जागृति’ रखा गया है।

श्री ओ.पी. निरंकारी, जोनल इंचार्ज चंडीगढ़ ने जानकारी देते हुए बताया कि यह वार्षिक संत समागम मानव कल्याण, प्रेम, सेवा, सद्भाव और मानव एकता की भावना को समर्पित होगा। समागम की सूचना से श्रद्धालुओं में उत्साह और आध्यात्मिक उमंग का वातावरण बना हुआ है।

‘जागृति’ बनेगी आध्यात्मिक यात्रा का संदेश

संत निरंकारी मिशन के अनुसार, जब मनुष्य के अंतर्मन में प्रभु का प्रकाश जागृत होता है तो उसके जीवन की दिशा बदल जाती है। सेवा में समर्पण, सुमिरन में शांति और सत्संग के माध्यम से सत्य की अनुभूति मनुष्य को प्रेम और प्रभु-भक्ति के मार्ग पर आगे बढ़ाती है।

इसी आत्मिक चेतना और भीतर के नवजागरण का संदेश इस वर्ष के संत समागम के विषय ‘जागृति’ में निहित है।

सेवा में जुटे श्रद्धालु

समागम की तैयारियां श्रद्धा, समर्पण, लगन और निःस्वार्थ सेवा-भाव के साथ तेजी से चल रही हैं। विभिन्न आयु वर्ग और सामाजिक पृष्ठभूमि से जुड़े श्रद्धालु तन-मन से सेवा कार्यों में जुटे हुए हैं।

समागम स्थल पर कोई निर्माण कार्य में सहयोग कर रहा है, तो कोई शामियाने लगाने, स्वच्छता, जल व्यवस्था और भोजन सेवा को व्यवस्थित करने में योगदान दे रहा है। वहीं समागम स्थल का मुख्य प्रवेश-द्वार भी आकार ले रहा है, जो प्रेम, समरसता और आत्मिक एकत्व का प्रतीक बनेगा।

सेवा में जुटे श्रद्धालुओं के चेहरों पर परिश्रम के बावजूद थकान के बजाय संतोष और समर्पण की भावना दिखाई दे रही है। उनके लिए सेवा केवल जिम्मेदारी नहीं, बल्कि सतगुरु के प्रति प्रेम और कृतज्ञता व्यक्त करने का माध्यम है।

सेवा, भक्ति और मानव कल्याण का संदेश

सतगुरु माता सुदीक्षा जी महाराज द्वारा भी सेवा, सत्संग और प्रभु-स्मरण के महत्व पर निरंतर बल दिया जाता है। संत समागम इसी आध्यात्मिक संदेश को जन-जन तक पहुंचाने का अवसर प्रदान करता है।

‘तन पवित्र सेवा किये, धन पवित्र दिये दान,
मन पवित्र हरि भजन सों, त्रिबिध होई कल्याण।’

इस संदेश का भाव है कि जब तन सेवा में, धन परोपकार में और मन प्रभु-भक्ति में समर्पित होता है, तब जीवन में सच्चे कल्याण और आत्मिक शांति का मार्ग प्रशस्त होता है।

श्रद्धालुओं के लिए की जा रही व्यापक व्यवस्थाएं

समागम में देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं की सुविधा को ध्यान में रखते हुए आवश्यक व्यवस्थाएं की जा रही हैं। सेवा, सत्कार, स्वच्छता, जल, भोजन और अन्य सुविधाओं को सुचारू रूप से संचालित करने के लिए बड़ी संख्या में सेवक निःस्वार्थ भाव से योगदान दे रहे हैं।

निरंकारी संत समागम केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि मानव एकता, प्रेम, शांति और समरसता का संदेश देने वाला आध्यात्मिक पर्व है। विभिन्न संस्कृतियों और क्षेत्रों से आने वाले श्रद्धालु यहां ‘वसुधैव कुटुम्बकम’ की भावना को साकार करते हुए सतगुरु की अमृतवाणी से अपने अंतर्मन को आलोकित करेंगे।

23 से 26 अक्टूबर तक आयोजित होने वाला यह 79वां वार्षिक संत समागम श्रद्धालुओं के लिए सेवा, भक्ति, सत्संग और आत्मिक जागृति से जुड़ी एक प्रेरणादायी आध्यात्मिक यात्रा बनने की उम्मीद है।

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