रिपोर्ट: नरेंद्र चावला
ब्यूरो चीफ – चंडीगढ़ ट्राइसिटी
द फ्रीवे ईगल
लालड़ू। समाज सेवा के क्षेत्र में सक्रिय भारतीय मानव अधिकार महासंघ, पंजाब के उपाध्यक्ष एवं समाजसेवक राजेश कुमार ने अपनी दिवंगत धर्मपत्नी श्रीमती पूनम जी (46 वर्ष) की अंतिम इच्छा को पूरा कर मानवता की एक प्रेरणादायक मिसाल पेश की है। उनके इस निर्णय से दो नेत्रहीन व्यक्तियों के जीवन में नई रोशनी पहुंची है।
जानकारी के अनुसार, श्रीमती पूनम जी ने अपने जीवनकाल में मरणोपरांत नेत्रदान का संकल्प लिया था। उनके निधन के बाद श्री राजेश कुमार एवं परिवार के सभी सदस्यों ने उनकी इस अंतिम इच्छा का सम्मान करते हुए नेत्रदान की प्रक्रिया पूरी कराई।
भारत विकास परिषद, शाखा लालड़ू के सहयोग तथा पीजीआई चंडीगढ़ से पहुंची विशेषज्ञ चिकित्सकों की टीम ने सफलतापूर्वक नेत्रदान की प्रक्रिया संपन्न कराई। दान किए गए दोनों नेत्र अब दो जरूरतमंद नेत्रहीन व्यक्तियों के जीवन में उजाला बिखेरेंगे।
दुःख की इस घड़ी में भी राजेश कुमार ने अपनी पत्नी के संकल्प को सर्वोपरि रखते हुए समाज को यह संदेश दिया कि इंसान अपने जीवन के बाद भी किसी के जीवन में नई उम्मीद और रोशनी छोड़ सकता है। उनके इस मानवीय निर्णय की क्षेत्रभर में सराहना की जा रही है।
इस पुण्य कार्य में पुत्र हितेश कुमार, वरुण कुमार, सागर, श्री प्रेम कुमार, श्री नरेश कुमार सहित समस्त गाखड़ परिवार ने सक्रिय सहयोग दिया और श्रीमती पूनम जी की अंतिम इच्छा का सम्मान करते हुए सेवा, संवेदना और मानवीय मूल्यों का उत्कृष्ट उदाहरण प्रस्तुत किया।
भारत विकास परिषद, शाखा लालड़ू के डिस्ट्रिक्ट कन्वीनर रघुनाथ नारंग सहित शाखा के पदाधिकारियों ने गाखड़ परिवार के इस प्रेरणादायी निर्णय की सराहना करते हुए दिवंगत आत्मा की शांति तथा शोकाकुल परिवार को इस कठिन समय में शक्ति प्रदान करने की प्रार्थना की।
गौरतलब है कि भारत विकास परिषद, शाखा लालड़ू अब तक 64 सफल मरणोपरांत नेत्रदान संपन्न करा चुकी है। संस्था लगातार लोगों को नेत्रदान के प्रति जागरूक कर रही है ताकि अधिक से अधिक जरूरतमंद लोगों के जीवन में रोशनी लाई जा सके।
मानवता का संदेश
“जीते जी रक्तदान, जाते-जाते नेत्रदान” केवल एक नारा नहीं, बल्कि मानव सेवा का सबसे बड़ा संदेश है। नेत्रदान से किसी व्यक्ति के जीवन में फिर से प्रकाश लौट सकता है और यही सच्ची मानवता की पहचान है।




