जंडियाला गुरु, अमृतसर, 19 सितंबर 2026:
बाज़ार से सब्ज़ी, फल, किराना या घर का सामान खरीदते समय प्लास्टिक की थैलियों का इस्तेमाल आज रोज़मर्रा की आदत बन गया है। सुविधा के लिए इस्तेमाल होने वाली पॉलीथिन पर्यावरण में प्लास्टिक कचरे की समस्या को बढ़ाती है। ऐसे में महार्षि चरक आयुर्वेदिक क्लिनिक, जंडियाला गुरु के आयुर्वेदिक फिजीशियन डॉ. गौरव कुमार ने लोगों से सिंगल-यूज़ प्लास्टिक का इस्तेमाल कम करने और कपड़े के बैग को दैनिक जीवन का हिस्सा बनाने की अपील की है।
बाजार जाते समय साथ रखें अपना बैग
डॉ. गौरव कुमार ने कहा कि बाजार जाते समय घर से कपड़े का बैग, जूट बैग या कोई अन्य पुनः उपयोग योग्य थैला साथ ले जाना एक छोटी लेकिन उपयोगी आदत हो सकती है। सब्ज़ी, फल या किराने का सामान खरीदने के लिए घर से निकलते समय यदि अपना बैग साथ रखा जाए, तो दुकानों से हर बार नई प्लास्टिक थैली लेने की आवश्यकता कम की जा सकती है।
छोटे बदलाव से पर्यावरण संरक्षण में योगदान
उन्होंने कहा कि पर्यावरण संरक्षण केवल सरकार या किसी एक संगठन की जिम्मेदारी नहीं है। प्रत्येक नागरिक अपने दैनिक जीवन में छोटे-छोटे बदलाव करके पर्यावरण संरक्षण में योगदान दे सकता है।
डॉ. गौरव कुमार ने लोगों से अपील करते हुए कहा कि पॉलीथिन के बजाय कपड़े और जूट के पुनः उपयोग योग्य बैग अपनाएं तथा प्लास्टिक के अनावश्यक इस्तेमाल को कम करने की दिशा में कदम उठाएं।
उन्होंने कहा कि यदि लोग अपनी रोज़मर्रा की खरीदारी में बार-बार मिलने वाली प्लास्टिक थैलियों के स्थान पर अपने साथ लाए गए बैग का इस्तेमाल करें, तो यह पर्यावरण के प्रति जिम्मेदार नागरिक व्यवहार की दिशा में एक सकारात्मक कदम हो सकता है।
लोगों के लिए संदेश
“पॉलीथिन को कहें ना, कपड़े के बैग को अपनाएं और स्वच्छ एवं स्वस्थ पर्यावरण की दिशा में अपना योगदान दें।”




