मोहाली, 7 अगस्त | रिपोर्ट: नरिंदर चावला। सतगुरु माता सुदीक्षा जी महाराज के पावन आशीर्वाद से मोहाली के फेस-6 स्थित संत निरंकारी सत्संग भवन में एक विशाल सत्संग का आयोजन किया गया। इस अवसर पर केंद्रीय ज्ञान प्रचारक महात्मा इंद्रजीत शर्मा ने सत्संग की अध्यक्षता करते हुए श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक जीवन, सेवा और मानव कल्याण का संदेश दिया।
अपने प्रवचन में महात्मा इंद्रजीत शर्मा ने कहा कि संत निरंकारी मिशन में अगस्त माह का विशेष आध्यात्मिक महत्व है। इस माह में मुक्त आत्माओं की स्मृति में ‘मुक्ति पर्व’ मनाया जाता है। उन्होंने कहा कि मिशन के पाँच सिद्धांत मानव जीवन को सही दिशा प्रदान करते हैं और जो गुरसिख इन सिद्धांतों को अपने जीवन में अपनाता है, वह भक्ति मार्ग पर चलते हुए मुक्ति पद को प्राप्त करता है।
उन्होंने कहा कि सतगुरु माता सुदीक्षा जी महाराज आज ब्रह्मज्ञान प्रदान कर मानव को जन्म-मरण के चक्र से मुक्ति का मार्ग दिखा रही हैं। ब्रह्मज्ञान प्राप्त होने के बाद व्यक्ति के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन आता है और यही परिवर्तन सतगुरु की सबसे बड़ी देन है।
9 अगस्त के रक्तदान शिविर में बढ़-चढ़कर भाग लेने का आह्वान
महात्मा इंद्रजीत शर्मा ने मोहाली सत्संग भवन में 9 अगस्त को आयोजित होने वाले विशाल रक्तदान शिविर का उल्लेख करते हुए कहा कि “रक्तदान मानवता की सेवा का सर्वोत्तम माध्यम है।” उन्होंने बताया कि संत निरंकारी मिशन पिछले लगभग 40 वर्षों से देश-विदेश में निरंतर रक्तदान शिविर आयोजित कर मानव कल्याण में उल्लेखनीय योगदान दे रहा है।
उन्होंने सभी श्रद्धालुओं एवं समाज के लोगों से रक्तदान शिविर में बढ़-चढ़कर भाग लेने और अधिक से अधिक लोगों को जीवनदान देने की प्रेरणा दी।
सेवा, सुमिरण और सत्संग हैं भक्ति के तीन आधार
अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि संत निरंकारी मिशन में सेवा, सुमिरण और सत्संग भक्ति के तीन प्रमुख स्तंभ हैं। जो व्यक्ति इन तीनों को अपने जीवन का अभिन्न हिस्सा बना लेता है, वह आध्यात्मिक उन्नति के साथ-साथ समाज के लिए भी प्रेरणास्रोत बन जाता है।
जोनल इंचार्ज ने किया स्वागत
कार्यक्रम के प्रारंभ में चंडीगढ़ जोन के जोनल इंचार्ज ओ. पी. निरंकारी तथा मोहाली ब्रांच के इंचार्ज गुलशन लूथरा ने केंद्रीय ज्ञान प्रचारक महात्मा इंद्रजीत शर्मा, उपस्थित गणमान्य अतिथियों एवं समस्त साध-संगत का स्वागत किया तथा सभी का आभार व्यक्त किया।
सत्संग में बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे और सभी ने मानव सेवा, आध्यात्मिक जीवन तथा रक्तदान के महत्व से जुड़े संदेशों को आत्मसात करने का संकल्प लिया।




