31 अक्टूबर 2026 | बिजनेस डेस्क
नई दिल्ली: भारतीय अर्थव्यवस्था में कारोबारी गतिविधियों के बढ़ने के संकेत मिल रहे हैं। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के आंकड़ों के अनुसार, सितंबर 2026 के अंत तक बैंकों द्वारा उद्योग और सेवा क्षेत्र को दिए गए कर्ज में सालाना आधार पर 19.1 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है। पिछले वर्ष इसी अवधि में यह वृद्धि 11.2 प्रतिशत थी। इससे उद्योगों, व्यापारिक प्रतिष्ठानों और सेवा क्षेत्र में वित्तीय जरूरतों की बढ़ती मांग का संकेत मिलता है। The Financial Express
उद्योगों को मिलने वाले कर्ज में तेजी
RBI के आंकड़ों के मुताबिक, सितंबर 2026 के अंत तक औद्योगिक क्षेत्र को दिए गए बैंक कर्ज में सालाना आधार पर 19.5 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई। पिछले साल इसी अवधि में यह वृद्धि 7.7 प्रतिशत थी।
इस वृद्धि में इंफ्रास्ट्रक्चर, धातु उद्योग, इंजीनियरिंग, केमिकल, खाद्य प्रसंस्करण और कपड़ा उद्योग जैसे क्षेत्रों की महत्वपूर्ण भूमिका रही।
सेवा क्षेत्र में भी बढ़ी कर्ज की मांग
सेवा क्षेत्र में बैंक कर्ज की वृद्धि दर और अधिक रही। सितंबर 2026 में इस क्षेत्र का कर्ज सालाना आधार पर 28.3 प्रतिशत बढ़ा, जबकि पिछले वर्ष इसी अवधि में यह 9.9 प्रतिशत था।
इसमें NBFC, व्यापार, कमर्शियल रियल एस्टेट, परिवहन और प्रोफेशनल सर्विसेज जैसे क्षेत्रों का योगदान रहा।
छोटे कारोबारियों के लिए क्या हैं संकेत?
बैंक कर्ज में बढ़ोतरी से छोटे और मध्यम कारोबारियों के लिए भी अवसरों के संकेत मिलते हैं। खासकर उन कारोबारों के लिए जिन्हें स्टॉक खरीदने, कर्मचारियों का भुगतान करने, उत्पादन बढ़ाने और दैनिक व्यापारिक जरूरतों को पूरा करने के लिए वर्किंग कैपिटल की आवश्यकता होती है।
हालांकि, कर्ज की उपलब्धता बढ़ने का अर्थ यह नहीं है कि हर कारोबारी को आसानी से ऋण मिल जाएगा। बैंक की पात्रता, क्रेडिट हिस्ट्री, कारोबार की वित्तीय स्थिति और पुनर्भुगतान क्षमता महत्वपूर्ण रहेंगी।
कारोबारियों के लिए आगे क्या?
अक्टूबर से मार्च का समय भारतीय कारोबार के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है। त्योहारी सीजन, व्यापारिक गतिविधियों और उत्पादन की मांग के चलते आने वाले महीनों में बैंकिंग क्षेत्र की भूमिका और महत्वपूर्ण हो सकती है।
विशेषज्ञों के अनुसार, कारोबारियों को कर्ज लेने से पहले अपनी वास्तविक जरूरत, ब्याज दर और भुगतान क्षमता का आकलन करना चाहिए।
निष्कर्ष
बैंक कर्ज में बढ़ोतरी भारतीय उद्योग और सेवा क्षेत्र में बढ़ती वित्तीय गतिविधियों का महत्वपूर्ण संकेत है। यदि यह रफ्तार बनी रहती है, तो आने वाले समय में उत्पादन, व्यापार और रोजगार के नए अवसर पैदा हो सकते हैं।
स्रोत: RBI के आंकड़ों पर आधारित रिपोर्ट – Financial Express, 31 अक्टूबर 2026।




