HomeNationalआत्ममंथन से आती है सच्ची आध्यात्मिकता

आत्ममंथन से आती है सच्ची आध्यात्मिकता

लुधियाना | 20 जुलाई 2026 | अमित कुमार:- लुधियाना के भारत नगर चौक स्थित संत निरंकारी सत्संग भवन में निरंकारी मिशन का महिला जोनल समागम श्रद्धा, भक्ति और आध्यात्मिक वातावरण के बीच सम्पन्न हुआ। समागम में दीनानगर से पधारीं वरिष्ठ प्रचारक डॉ. सरला जी ने मुख्य वक्ता के रूप में संगत को संबोधित करते हुए आत्ममंथन और वास्तविक आध्यात्मिकता का संदेश दिया।

अपने प्रेरणादायक विचारों में डॉ. सरला जी ने कहा कि सच्ची आध्यात्मिकता केवल धार्मिक अनुष्ठानों, पाठ-पूजा या बाहरी आडम्बरों तक सीमित नहीं होती, बल्कि आत्ममंथन के माध्यम से अपने जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाने का नाम ही वास्तविक आध्यात्मिकता है।

उन्होंने कहा कि यदि ईश्वर का ज्ञान प्राप्त करने के बाद भी मनुष्य के भीतर अहंकार, भेदभाव, निंदा और अन्य विकार बने रहें, तो ऐसी आध्यात्मिकता केवल दिखावा बनकर रह जाती है। असली आध्यात्मिकता वही है, जो व्यक्ति के व्यवहार, विचार और चरित्र में नम्रता, प्रेम, समानता, सेवा और मानवता का संचार करे।

डॉ. सरला जी ने संगत से आत्मविश्लेषण करने का आह्वान करते हुए कहा कि प्रत्येक व्यक्ति स्वयं से यह प्रश्न करे कि क्या वह वास्तव में आध्यात्मिक जीवन जी रहा है या केवल धार्मिक होने का दावा कर रहा है। उन्होंने कहा कि आत्ममंथन के माध्यम से ही मनुष्य अपनी कमियों को पहचानकर उन्हें दूर कर सकता है और सतगुरु के बताए मार्ग पर चलते हुए मानवता की सेवा कर सकता है।

इस अवसर पर लुधियाना के संयोजक संत अमित कुंद्रा जी ने “सतगुरु माता जी की जय” के जयघोष के साथ डॉ. सरला जी का स्वागत किया। उन्होंने निरंकारी सतगुरु माता सुदीक्षा जी महाराज के चरणों में समस्त विश्व के सुख, शांति और कल्याण की प्रार्थना की।

समागम में बड़ी संख्या में महिला श्रद्धालुओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। श्रद्धालुओं ने आध्यात्मिक प्रवचनों को गंभीरता से सुना और अंत में सामूहिक प्रार्थना तथा प्रसाद वितरण के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ।

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