पंजाब एवं चंडीगढ़ जर्नलिस्ट्स यूनियन का 13वां स्थापना दिवस शहीद करतार सिंह सराभा को समर्पित
लुधियाना/मुल्लांपुर दाखा | 1 नवंबर 2026 (अमित अरोड़ा)
पंजाब एवं चंडीगढ़ जर्नलिस्ट्स यूनियन के 13वें स्थापना दिवस के अवसर पर शहीद करतार सिंह सराभा को समर्पित राज्य स्तरीय समारोह का आयोजन डॉ. बी.आर. अंबेडकर भवन में किया गया। इस दौरान विभिन्न वक्ताओं ने देशभर में पत्रकारों के खिलाफ बढ़ती दमनकारी कार्रवाई, धमकियों, झूठे मुकदमों और मीडिया संस्थानों पर आर्थिक दबाव बनाने की कोशिशों के खिलाफ पत्रकार समुदाय से एकजुट होकर संघर्ष करने का आह्वान किया।
वक्ताओं ने कहा कि पत्रकारिता लोकतंत्र का महत्वपूर्ण स्तंभ है, लेकिन आज पत्रकारों की स्वतंत्र आवाज को दबाने के लिए कई तरह के हथकंडे अपनाए जा रहे हैं। सरकारों से सवाल पूछने और व्यवस्था की खामियों को उजागर करने वाले पत्रकारों पर झूठे मामले दर्ज करने, मारपीट करने तथा पुलिस एवं प्रशासन के माध्यम से धमकियां देने की घटनाएं चिंताजनक हैं। उन्होंने सरकारी विज्ञापनों को मीडिया संस्थानों पर आर्थिक दबाव बनाने के साधन के रूप में इस्तेमाल किए जाने की भी आलोचना की।
डीपीडीपी एक्ट को लेकर जताई चिंता
समारोह में केंद्र सरकार द्वारा सूचना तंत्र और मीडिया पर नियंत्रण से संबंधित बनाए जा रहे कानूनों एवं नियमों पर भी चिंता व्यक्त की गई। वक्ताओं ने डिजिटल व्यक्तिगत डेटा संरक्षण (डीपीडीपी) एक्ट का उल्लेख करते हुए कहा कि इसकी नई शर्तें लागू होने से समाचारों के प्रकाशन और प्रसारण में गंभीर बाधाएं उत्पन्न हो सकती हैं। इससे समाचार संस्थानों और न्यूजरूम के कामकाज पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की आशंका है।
उन्होंने बताया कि डिजिटल न्यूज पब्लिशर्स एसोसिएशन ने इस कानून को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देते हुए पत्रकारिता क्षेत्र को इसके दायरे से बाहर रखने की मांग की है। वक्ताओं के अनुसार, सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल कानून पर रोक नहीं लगाई है, लेकिन केंद्रीय कानून मंत्रालय और इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय को नोटिस जारी किए हैं।
वरिष्ठ वक्ताओं ने मीडिया की स्वतंत्रता पर रखे विचार
समारोह को प्रसिद्ध चिंतक एवं बाबा फरीद यूनिवर्सिटी के पूर्व रजिस्ट्रार डॉ. प्यारा लाल गर्ग, पंजाब यूनिवर्सिटी के सीनेटर एवं प्रगतिशील लेखक संघ के राष्ट्रीय महासचिव डॉ. सुखदेव सिंह सिरसा, इंडियन जर्नलिस्ट्स यूनियन के राष्ट्रीय अध्यक्ष बलविंदर जम्मू, पूर्व अध्यक्ष एस.एन. सिन्हा, महासचिव डी. सोमा सुंदर तथा पंजाब कृषि विश्वविद्यालय के उपकुलपति डॉ. एच.एस. धालीवाल ने संबोधित किया।
वक्ताओं ने कहा कि मीडिया की स्वतंत्रता पर विभिन्न तरीकों से हमले किए जा रहे हैं। उन्होंने जंतर-मंतर पर आंदोलनों की कवरेज कर रहे पत्रकारों, विशेषकर महिला पत्रकारों को निशाना बनाए जाने और उनके साथ कथित दुर्व्यवहार की कड़ी निंदा की। उन्होंने कहा कि पत्रकार अपनी पेशेवर जिम्मेदारी निभा रहे थे और उन्होंने अपने पहचान पत्र भी दिखाए थे, इसके बावजूद उनके साथ ज्यादती की गई।
दो मुस्लिम महिला पत्रकारों के खिलाफ हुई कार्रवाई का उल्लेख करते हुए वक्ताओं ने कहा कि मीडिया को धर्म के आधार पर बांटने की कोशिशें भी बेहद चिंताजनक हैं।
पंजाब सरकार पर भी उठाए सवाल
पंजाब की आम आदमी पार्टी सरकार पर टिप्पणी करते हुए यूनियन के नेताओं ने कहा कि सत्ता में आने के बाद लगभग पौने पांच वर्ष बीतने के बावजूद पत्रकारों की प्रमुख मांगों पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया गया है।
उन्होंने आरोप लगाया कि सरकारी विज्ञापन नीति का इस्तेमाल मीडिया संस्थानों पर दबाव बनाने के लिए किया जा रहा है, जिससे स्वतंत्र और निष्पक्ष पत्रकारिता प्रभावित हो रही है।
16 से 23 नवंबर तक प्रदेशभर में होंगे कार्यक्रम
समारोह को संबोधित करते हुए पंजाब एवं चंडीगढ़ जर्नलिस्ट्स यूनियन के राज्य चेयरमैन बलबीर जंडू, प्रधान जय सिंह छिब्बर और महासचिव संतोष गिल ने 16 नवंबर से 23 नवंबर तक राष्ट्रीय प्रेस दिवस और शहीद करतार सिंह सराभा के शहीदी दिवस को समर्पित कार्यक्रम एवं गतिविधियां पंजाबभर में आयोजित करने का आह्वान किया।
उन्होंने कहा कि पत्रकारिता की स्वतंत्रता, पत्रकारों की सुरक्षा और लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा के लिए आवाज बुलंद करना समय की महत्वपूर्ण आवश्यकता है।
इस अवसर पर लुधियाना (देहाती) जिला इकाई के प्रधान निर्मल सिंह धालीवाल ने अतिथियों का स्वागत किया। कार्यक्रम की शुरुआत शहीद करतार सिंह सराभा को श्रद्धांजलि अर्पित करके की गई।
समारोह में यूनियन के कोषाध्यक्ष बिंदू सिंह, जगतार भुल्लर, जगतार सिद्धू, सुखनैब सिद्धू, जगसीर संधू और तेजिंदर थिंद सहित अन्य नेताओं ने भी अपने विचार रखे। इस दौरान पंजाब एवं चंडीगढ़ जर्नलिस्ट्स यूनियन की संस्थापक टीम सहित कई महत्वपूर्ण व्यक्तित्वों को सम्मानित भी किया गया।




