चंडीगढ़, 22 जुलाई | द फ्रीवे ईगल | रिपोर्टर: नरिंदर चावला
भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के वरिष्ठ नेता एवं पूर्व प्रदेश अध्यक्ष सुनील जाखड़ ने पंजाब की आम आदमी पार्टी (AAP) सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए आरोप लगाया कि सरकार ने पहले नौकरशाही का राजनीतिकरण किया और अब खुलेआम राजनीति का अपराधीकरण कर रही है। उन्होंने कहा कि सीमावर्ती राज्य पंजाब में यह प्रवृत्ति लोकतंत्र और कानून व्यवस्था के लिए गंभीर खतरा बन सकती है।
चंडीगढ़ में आयोजित एक प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए सुनील जाखड़ ने कहा कि स्थानीय निकाय चुनावों तथा उसके बाद मेयर और नगर परिषद अध्यक्षों के चुनावों के दौरान भगवंत मान सरकार ने नौकरशाही का दुरुपयोग कर लोकतांत्रिक प्रक्रिया को कमजोर किया। उन्होंने आरोप लगाया कि अधिकारियों पर राजनीतिक दबाव इतना बढ़ गया है कि वे संविधान के अनुरूप स्वतंत्र रूप से कार्य करने के बजाय सरकार के दबाव में फैसले लेने को मजबूर हैं।
नौकरशाही की स्वतंत्रता खत्म होने का आरोप
जाखड़ ने कहा कि नौकरशाही लोकतंत्र की मजबूत कड़ी होती है, लेकिन वर्तमान सरकार ने अधिकारियों की स्वतंत्रता और निष्पक्षता को प्रभावित किया है। उनका कहना था कि जब प्रशासनिक अधिकारी सरकार के दबाव में काम करेंगे तो आम जनता को निष्पक्ष न्याय मिलना मुश्किल हो जाएगा।
राजनीति में आपराधिक तत्वों को शामिल करने का आरोप
भाजपा नेता ने आरोप लगाया कि जनता का विश्वास खो चुकी AAP सरकार अब राजनीतिक लाभ के लिए आपराधिक तत्वों को राजनीति में शामिल करने का प्रयास कर रही है। उन्होंने कहा कि सरकार एक ओर “ऑपरेशन प्रहार” के तहत गैंगस्टरों के खिलाफ कार्रवाई का दावा करती है, जबकि दूसरी ओर आपराधिक पृष्ठभूमि वाले लोगों को राजनीति में जगह देकर विरोधाभासी संदेश दे रही है।
उन्होंने चेतावनी दी कि यदि नौकरशाही का राजनीतिकरण और राजनीति का अपराधीकरण इसी तरह जारी रहा तो पंजाब एक बार फिर कठिन दौर की ओर बढ़ सकता है।
लोकतंत्र विरोधी कदमों का करेंगे विरोध
सुनील जाखड़ ने कहा कि भाजपा पंजाब और लोकतंत्र विरोधी किसी भी कदम का मजबूती से विरोध करेगी। उन्होंने कहा कि पार्टी जनता के अधिकारों की रक्षा के लिए हर स्तर पर संघर्ष जारी रखेगी।
सफाई कर्मचारियों और मनरेगा कर्मियों का मुद्दा भी उठाया
प्रेस वार्ता के दौरान जाखड़ ने राज्य में हड़ताल कर रहे सफाई कर्मचारियों की मांगों की अनदेखी करने का आरोप भी सरकार पर लगाया। उन्होंने कहा कि सरकार कर्मचारियों की समस्याओं का समाधान करने के बजाय उन्हें नजरअंदाज कर रही है।
इसके साथ ही उन्होंने मनरेगा कर्मचारियों पर हुए लाठीचार्ज की कड़ी निंदा करते हुए कहा कि यह सरकार की संवेदनहीनता को दर्शाता है। उन्होंने आरोप लगाया कि आम लोगों और कर्मचारियों से जुड़े मुद्दों के समाधान के प्रति सरकार गंभीर नहीं है।




