चेन्नई | 8 मई 2026 | द फ्रीवे ईगल:- तमिलनाडु की राजनीति इस समय बेहद नाटकीय मोड़ पर पहुंच चुकी है। विधानसभा चुनाव में अभिनेता से नेता बने विजय की पार्टी तमिलगा वेत्री कझगम (TVK) सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है, लेकिन स्पष्ट बहुमत नहीं मिलने के कारण राज्य में सरकार गठन को लेकर जबरदस्त राजनीतिक हलचल शुरू हो गई है। इस पूरे घटनाक्रम के बीच राज्यपाल द्वारा 118 विधायकों के समर्थन पत्र की मांग किए जाने से संवैधानिक बहस और तेज हो गई है।
234 सदस्यीय तमिलनाडु विधानसभा में सरकार बनाने के लिए 118 सीटों का आंकड़ा जरूरी है। चुनाव परिणामों में TVK ने शानदार प्रदर्शन करते हुए 108 सीटें हासिल कीं और राज्य की सबसे बड़ी पार्टी बनकर सामने आई। हालांकि बहुमत से कुछ सीटें दूर होने के कारण अब विजय सहयोगी दलों और निर्दलीय विधायकों का समर्थन जुटाने में लगे हुए हैं।
राज्यपाल के रुख पर उठे सवाल
राज्यपाल की ओर से पूर्ण समर्थन पत्र पेश करने की शर्त रखे जाने के बाद विपक्षी दलों और संवैधानिक विशेषज्ञों ने सवाल उठाने शुरू कर दिए हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि संसदीय लोकतंत्र की परंपरा के अनुसार सबसे बड़ी पार्टी को पहले सरकार बनाने का अवसर दिया जाना चाहिए और बहुमत का परीक्षण विधानसभा में फ्लोर टेस्ट के जरिए कराया जाना चाहिए।
इसी बहस के बीच 1994 का सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक ‘एसआर बोम्मई बनाम भारत सरकार’ फैसला फिर चर्चा में आ गया है। इस फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट कहा था कि किसी भी सरकार का बहुमत राजभवन में नहीं बल्कि विधानसभा के फ्लोर पर तय होगा। यही फैसला भारतीय लोकतंत्र और संघीय व्यवस्था की सबसे बड़ी संवैधानिक ढाल माना जाता है।
क्या है एसआर बोम्मई केस?
एसआर बोम्मई कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री थे। 1989 में उनकी सरकार को बहुमत खोने के आरोप में बर्खास्त कर दिया गया था। मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा, जहां अदालत ने ऐतिहासिक फैसला देते हुए कहा कि चुनी हुई सरकारों को केवल राजनीतिक दावों या राज्यपाल की रिपोर्ट के आधार पर नहीं हटाया जा सकता। अदालत ने कहा कि बहुमत का फैसला सदन में फ्लोर टेस्ट के जरिए ही होगा।
आज तमिलनाडु की राजनीति में यही फैसला सबसे बड़ा संवैधानिक आधार बनकर सामने आ रहा है। कई राजनीतिक दलों का कहना है कि अगर TVK सबसे बड़ी पार्टी है तो उसे सरकार बनाने का मौका मिलना चाहिए और उसके बाद विधानसभा में बहुमत साबित करने का अवसर दिया जाना चाहिए।
विजय के समर्थन में बढ़ी राजनीतिक आवाजें
अभिनेता और नेता कमल हासन सहित कई राजनीतिक नेताओं ने विजय के समर्थन में बयान दिए हैं। उनका कहना है कि जनता ने TVK को सबसे बड़ा जनादेश दिया है, इसलिए लोकतांत्रिक परंपराओं का सम्मान करते हुए सरकार बनाने का पहला मौका उसी पार्टी को मिलना चाहिए।
राजनीतिक हलकों में यह भी चर्चा है कि कांग्रेस और कुछ छोटे दल विजय को समर्थन देने पर विचार कर रहे हैं। वहीं दूसरी तरफ विपक्षी दल राज्यपाल के फैसले को संविधान की कसौटी पर कस रहे हैं।
तमिलनाडु में बढ़ा सियासी तापमान
सूत्रों के मुताबिक TVK लगातार अन्य विधायकों के संपर्क में है और जल्द ही राज्यपाल के सामने दोबारा दावा पेश कर सकती है। दूसरी ओर राज्यपाल के अगले कदम पर पूरे देश की नजरें टिकी हुई हैं क्योंकि यह मामला केवल सरकार गठन तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि लोकतंत्र, संघवाद और संवैधानिक मर्यादाओं की बड़ी परीक्षा बन चुका है।
तमिलनाडु की राजनीति में अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या सबसे बड़ी पार्टी को फ्लोर टेस्ट का मौका मिलेगा या राज्य में राजनीतिक संकट और गहराएगा।




