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सतगुरु के वचनों पर चलने से मिलता है सच्चा आध्यात्मिक आनंद: अमृत पाल सिंह

चंडीगढ़, 13 जुलाई (नरेंद्र चावला) संत निरंकारी मिशन के केंद्रीय प्रचारक श्री अमृत पाल सिंह जी ने कहा कि सतगुरु के वचन अनमोल होते हैं और जो श्रद्धालु उन्हें केवल सुनने तक सीमित नहीं रहता, बल्कि अपने जीवन में धारण कर उनके अनुसार आचरण करता है, वही वास्तविक मुक्ति का अधिकारी बनता है। ऐसा भक्त न केवल स्वयं का जीवन सफल बनाता है, बल्कि दूसरों को भी सही दिशा प्रदान करता है।

सेक्टर-30 स्थित संत निरंकारी सत्संग भवन में आयोजित विशाल सत्संग में हजारों श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि सद्गुरु माता सुदीक्षा जी महाराज द्वारा कराई गई परमात्मा की जानकारी के बाद निराकार प्रभु के साथ इकमिक होने की भावना ही आध्यात्मिक जीवन का वास्तविक उद्देश्य है। यह अवस्था सतगुरु की कृपा, सत्संग, सेवा, सिमरन और गुरमत के मार्ग पर निरंतर चलते रहने से प्राप्त होती है।

उन्होंने गुरबाणी का उल्लेख करते हुए कहा कि जिस पर गुरु की कृपा होती है, वही इस आध्यात्मिक मार्ग की सही पहचान कर पाता है और धीरे-धीरे निराकार प्रभु में लीन होने का अनुभव करता है।

श्री अमृत पाल सिंह जी ने कहा कि आध्यात्मिक जीवन में आगे बढ़ने के लिए आत्मचिंतन अत्यंत आवश्यक है। सत्संग में आने का उद्देश्य केवल उपस्थिति दर्ज कराना नहीं, बल्कि स्वयं का मूल्यांकन करना भी है कि हम आध्यात्मिक मार्ग पर कितनी प्रगति कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि पूर्वज संतों और महापुरुषों का जीवन हमारे लिए प्रेरणा का स्रोत है, जिनसे हमें अपने जीवन का आकलन करने की सीख मिलती है।

उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि ज्ञान, सतगुरु और परमात्मा सभी के लिए समान हैं, लेकिन उन्हें ग्रहण करने की पात्रता प्रत्येक व्यक्ति की श्रद्धा, विश्वास और समर्पण पर निर्भर करती है। इसी कारण एक ही सत्संग में कुछ श्रद्धालु ईश्वरीय आनंद से सराबोर दिखाई देते हैं, जबकि कुछ लोगों के मन में अभी भी शंकाएं बनी रहती हैं। जब श्रद्धालु सतगुरु के वचनों पर पूर्ण विश्वास कर उन्हें अपने जीवन में अपनाता है, तभी वह निराकार की वास्तविक महिमा को समझ पाता है।

पूज्य बाबा हरदेव सिंह जी महाराज के विचारों का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि जिस प्रकार कोई व्यक्ति पानी में जितना अधिक उतरता है, उसे उतनी ही अधिक शीतलता का अनुभव होता है, उसी प्रकार जो श्रद्धालु अपने हृदय में निराकार का जितना अधिक वास करता है, वह उतना ही अधिक आध्यात्मिक आनंद प्राप्त करता है। पूर्ण समर्पण की अवस्था में पहुंचने वाले संत ही परमात्मा के साथ इकमिक होने का अनुभव करते हैं और उनका जीवन समाज के लिए प्रेरणा बन जाता है।

सत्संग के अंत में उन्होंने सभी श्रद्धालुओं से प्रेम, नम्रता, सेवा, सिमरन और सतगुरु के उपदेशों को अपने दैनिक जीवन का आधार बनाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि यही मार्ग मानव जीवन को सार्थक बनाता है और समाज में भाईचारे, सद्भाव तथा आध्यात्मिक मूल्यों को मजबूत करता है।

इससे पूर्व संत निरंकारी सत्संग भवन, सेक्टर-30 के संयोजक श्री नवनीत पाठक जी ने सूरत से पधारे केंद्रीय प्रचारक श्री अमृत पाल सिंह जी का समस्त साध-संगत की ओर से स्वागत एवं आभार व्यक्त किया।

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