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खानकोट में जोनल बाल संत समागम, बच्चों ने दिए आध्यात्मिक संस्कारों के संदेश

अमृतसर, 13 जुलाई (वरुण कुमार) संत निरंकारी सत्संग भवन, खानकोट में सोमवार को जोनल स्तरीय निरंकारी बाल संत समागम का भव्य एवं प्रेरणादायी आयोजन किया गया। इस आध्यात्मिक समागम में संत निरंकारी मंडल, दिल्ली के प्रचार विभाग के मेंबर इंचार्ज श्री राकेश मुटरेजा मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। कार्यक्रम में अमृतसर सहित आसपास के क्षेत्रों और दूर-दराज से पहुंचे हजारों श्रद्धालु भक्तों ने भाग लेकर बाल संतों का उत्साहवर्धन किया।

समागम का मुख्य आकर्षण बच्चों द्वारा प्रस्तुत किए गए आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम रहे। नन्हे-मुन्ने बाल संतों ने कविताओं, भक्ति गीतों, समूहगान और प्रेरणादायी लघु नाटिकाओं के माध्यम से आध्यात्मिक मूल्यों का सुंदर संदेश दिया। प्रस्तुतियों में पारिवारिक भाईचारा, आपसी प्रेम, शिक्षा का महत्व तथा मोबाइल फोन के अत्यधिक उपयोग से बचने जैसे सामाजिक विषयों को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया गया। बच्चों की भावपूर्ण प्रस्तुतियों ने उपस्थित संगत को भाव-विभोर कर दिया।

मुख्य अतिथि श्री राकेश मुटरेजा ने अपने संबोधन में निरंकारी सतगुरु माता सुदीक्षा जी महाराज का पावन संदेश साझा करते हुए कहा कि बच्चों का सरल, निष्कपट और निर्मल स्वभाव हर व्यक्ति के लिए प्रेरणा का स्रोत है। उन्होंने कहा कि बच्चे क्षणभर के लिए नाराज़ होते हैं, लेकिन मन में किसी प्रकार की कटुता नहीं रखते और तुरंत प्रेमपूर्वक एक-दूसरे से मिल जाते हैं। यदि प्रत्येक व्यक्ति ऐसा ही क्षमाशील और विशाल हृदय अपनाए, तो समाज में प्रेम, शांति और सौहार्द स्वतः स्थापित हो जाएगा।

उन्होंने आगे कहा कि बच्चे ईर्ष्या, द्वेष और वैमनस्य से दूर रहते हैं। उनका निष्कलंक मन हमें भी अपने जीवन से अहंकार और ईर्ष्या का त्याग कर प्रेम, सहयोग और सद्भाव की भावना अपनाने की प्रेरणा देता है।

उन्होंने कहा कि एक सच्चा आध्यात्मिक साधक परिस्थितियां अनुकूल हों या प्रतिकूल, हर हाल में परमात्मा पर अटूट विश्वास बनाए रखता है। जीवन की हर स्थिति में प्रसन्न और आनंदमय रहना ही आध्यात्मिक जीवन की वास्तविक पहचान है।

समागम के समापन अवसर पर अमृतसर जोन के जोनल इंचार्ज श्री राकेश सेठी ने मुख्य अतिथि, आयोजन समिति और सभी श्रद्धालु भक्तों का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि इस प्रकार के बाल संत समागम नई पीढ़ी में आध्यात्मिक संस्कार, नैतिक मूल्यों, अनुशासन और मानवता की भावना को मजबूत करने के साथ-साथ सतगुरु के प्रेम, एकता और सद्भाव के संदेश को समाज के प्रत्येक वर्ग तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।

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