HomeReligiousफगवाड़ा में इंग्लिश मीडियम समागम, आत्म-निरीक्षण और भक्ति का संदेश

फगवाड़ा में इंग्लिश मीडियम समागम, आत्म-निरीक्षण और भक्ति का संदेश

फगवाड़ा, 8 अगस्त 2026। संत निरंकारी सत्संग भवन, फगवाड़ा में कपूरथला जोन का इंग्लिश मीडियम समागम श्रद्धा, भक्ति और आध्यात्मिक भाव से आयोजित किया गया। समागम में बच्चों, युवाओं सहित विभिन्न आयु वर्ग के श्रद्धालुओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया और सतगुरु के संदेश को अपनी प्रस्तुतियों के माध्यम से सुंदर ढंग से प्रस्तुत किया।

समागम में चंडीगढ़ से पधारे आदरणीय श्री नरलेप सिंह जी ने अपने प्रवचनों में कहा कि परम पूज्य सतगुरु माता सुदीक्षा जी महाराज की असीम कृपा और दिव्य आशीर्वाद से ऐसे आनंदमयी आध्यात्मिक कार्यक्रम में शामिल होकर सत्संग का श्रवण करना सौभाग्य की बात है।

उन्होंने कहा कि कार्यक्रम में केवल युवाओं ने ही नहीं, बल्कि बच्चों से लेकर बड़ों तक हर आयु वर्ग के लोगों ने पूरे उत्साह के साथ सहभागिता की। सभी प्रतिभागियों ने भक्ति के विभिन्न आयामों को अपनी प्रस्तुतियों के माध्यम से प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया। प्रत्येक प्रस्तुति में नवीनता, विविधता और गहराई देखने को मिली।

मोबाइल के बजाय तैयारी और आत्मविश्वास से दी प्रस्तुतियां

श्री नरलेप सिंह जी ने प्रतिभागियों की विशेष सराहना करते हुए कहा कि उन्हें सबसे अधिक प्रभावित करने वाली बात यह रही कि किसी भी प्रतिभागी ने अपनी प्रस्तुति के दौरान मोबाइल फोन का सहारा नहीं लिया। सभी ने पूरी तैयारी, आत्मविश्वास और समर्पण के साथ मंच पर अपनी बात रखी।

उन्होंने कहा कि उनके जीवन में जो कुछ भी है, वह केवल सतगुरु की कृपा है।

अपनी कमियों को पहचानना ही आत्म-जागृति

प्रवचन के दौरान उन्होंने कहा कि कुछ समय पहले उन्होंने एक सुंदर प्रश्न पढ़ा था—“मनुष्य वास्तव में इंसान कब बनता है?” इसका उत्तर है कि जब व्यक्ति अपनी गलतियों को पहचानना शुरू करता है और उन्हें सुधारने में स्वयं को व्यस्त कर लेता है, तभी वह सच्चे अर्थों में इंसान बनता है।

उन्होंने कहा कि यही सतगुरु का संदेश भी है। यदि हम अपनी कमियों को पहचानकर उन्हें सुधारने का प्रयास करें, तो हमारा ध्यान दूसरों की कमियां खोजने में नहीं जाएगा। यही आत्म-जागृति है और यही आत्म-निरीक्षण का वास्तविक अर्थ है।

उन्होंने साध संगत को प्रेरित करते हुए कहा कि साधक वही है जो प्रतिदिन स्वयं को कल से बेहतर और आने वाले कल में आज से भी बेहतर बनाने का प्रयास करता है। यदि इंसान हर दिन स्वयं में थोड़ा-सा सुधार करने का प्रयास करे तो यही सच्ची साधना है।

परमात्मा को खोजने की नहीं, महसूस करने की जरूरत

श्री नरलेप सिंह जी ने कहा कि यदि हमारे हृदय में यह भाव बस जाए कि परमात्मा हर पल हमारे साथ है, तो फिर हमें उसे अलग से खोजने की आवश्यकता नहीं पड़ेगी। उन्होंने संगत से सतगुरु के संदेश को अपने जीवन में अपनाने और निरंतर आत्म-सुधार की दिशा में आगे बढ़ने का आह्वान किया।

उन्होंने इंग्लिश मीडियम संगत के महत्व पर भी प्रकाश डाला और कहा कि प्रत्येक ब्रांच में इंग्लिश मीडियम संगत अवश्य होनी चाहिए, ताकि अधिक से अधिक लोग सतगुरु के संदेश और आशीर्वाद से जुड़ सकें।

उन्होंने अपने अनुभव को साझा करते हुए बताया कि एक बार वह समागम से पहले इंग्लिश मीडियम संगत में नहीं जा पाए थे। अगले दिन समागम में जब उन्हें मंच से बोलने का अवसर मिला तो सतगुरु बाबा हरदेव सिंह जी महाराज का संदेश मिला कि उस दिन उन्हें इंग्लिश में बोलना है, क्योंकि वह पिछले दिन इंग्लिश मीडियम संगत में नहीं आए थे। उन्होंने इसे सतगुरु की सीख और प्रेमपूर्ण मार्गदर्शन के रूप में याद किया।

आयोजकों के लिए की अरदास

समागम के सफल आयोजन के लिए उन्होंने कपूरथला जोन के जोनल इंचार्ज श्री गुलशन लाल आहूजा जी, श्री मलकियत चंद जी, संयोजक फगवाड़ा ब्रांच तथा सभी अधिकारीजनों एवं प्रबंधकों के प्रति आभार व्यक्त किया।

उन्होंने परम पूज्य सतगुरु माता सुदीक्षा जी महाराज के चरणों में अरदास करते हुए कहा कि सभी को भक्ति प्रदान हो और सभी के जीवन में सुख-शांति बनी रहे।

समागम का मुख्य संदेश यही रहा कि सच्ची भक्ति केवल शब्दों और प्रस्तुतियों तक सीमित नहीं, बल्कि अपनी कमियों को पहचानकर उन्हें सुधारने और हर दिन स्वयं को बेहतर बनाने का नाम है।

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