जंडियाला गुरु, जिला अमृतसर | 01 नवंबर 2026 (डॉ. गौरव कुमार)
आज के आधुनिक दौर में बच्चों के सर्वांगीण विकास के साथ उनमें मानवीय गुणों और नैतिक मूल्यों का विकास भी एक बड़ी चुनौती बनता जा रहा है। प्रेम, दया, करुणा, ईमानदारी, सहयोग और बड़ों के प्रति सम्मान जैसे गुण बच्चों के बेहतर भविष्य और मजबूत समाज की नींव हैं।
आज माता-पिता अपनी व्यस्त दिनचर्या के कारण बच्चों को पर्याप्त समय नहीं दे पाते। बच्चों की जरूरतें पूरी करना जितना जरूरी है, उतना ही आवश्यक उनके साथ समय बिताना, उनकी बातें सुनना और उनकी भावनाओं को समझना भी है। माता-पिता को प्रतिदिन कुछ समय बच्चों के साथ जरूर बिताना चाहिए, ताकि उनमें अच्छे संस्कार विकसित हो सकें।
बच्चों को महान गुरुओं, वीर योद्धाओं और महापुरुषों की प्रेरणादायक जीवन गाथाओं से भी परिचित कराना चाहिए। उनके जीवन से बच्चों को साहस, त्याग, सेवा, अनुशासन और मानवता की सीख मिलती है। ऐसी प्रेरणादायक कहानियां बच्चों को अपनी संस्कृति और ऐतिहासिक विरासत से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।
इसके साथ ही बच्चों को मोबाइल फोन, टीवी और अन्य डिजिटल माध्यमों पर अधिक समय बिताने के बजाय खेलकूद और शारीरिक गतिविधियों के लिए प्रोत्साहित करना चाहिए। खेल न केवल बच्चों को स्वस्थ रखते हैं, बल्कि उनमें टीम भावना, अनुशासन, धैर्य, नेतृत्व क्षमता और हार-जीत को स्वीकार करने का गुण भी विकसित करते हैं।
बच्चों के चरित्र निर्माण में परिवार, विद्यालय और समाज की समान रूप से महत्वपूर्ण भूमिका है। शिक्षा का उद्देश्य केवल अच्छे अंक प्राप्त करना या भविष्य में रोजगार हासिल करना नहीं होना चाहिए, बल्कि बच्चों को एक अच्छा, जिम्मेदार और संवेदनशील इंसान बनाना भी होना चाहिए।
आज जरूरत है कि माता-पिता बच्चों को पर्याप्त समय दें, उनके साथ खुलकर संवाद करें, उन्हें अपनी संस्कृति और इतिहास से जोड़ें तथा सकारात्मक गतिविधियों के लिए प्रेरित करें। अच्छे संस्कार, मानवीय मूल्य और स्वस्थ जीवनशैली ही बच्चों को एक जिम्मेदार नागरिक बनाने में सहायक होंगे।
संदेश: बच्चों को केवल सफल बनाना ही नहीं, बल्कि एक अच्छा इंसान बनाना भी हमारी सबसे बड़ी जिम्मेदारी है।




