चंडीगढ़, 21 मई 2026 | नरेंद्र चावला:- संत निरंकारी सत्संग भवन, सेक्टर-15, चंडीगढ़ में आयोजित भव्य एवं प्रेरणादायी बाल समागम में बच्चों ने अपनी आध्यात्मिक प्रस्तुतियों से सभी का मन मोह लिया। समागम में हजारों की संख्या में बच्चे, महिलाएं, नौजवान और बुजुर्ग शामिल हुए। कार्यक्रम के दौरान गीत, कविता, भाषण, कव्वाली, स्किट और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के माध्यम से बच्चों ने सतगुरु माता सुदीक्षा जी महाराज के संदेशों को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया।
मनीमाजरा के मुखी श्री अमरजीत सिंह जी ने संगत को संबोधित करते हुए कहा कि सतगुरु द्वारा दिए गए ब्रह्मज्ञान और शिक्षाओं से बच्चों में अनुशासन, मर्यादा, शुकराना और मानवता जैसे संस्कार विकसित होते हैं। उन्होंने कहा कि यदि नई पीढ़ी सत्संग और सतगुरु की शिक्षाओं से जुड़ी रहे, तो वे देश और समाज के आदर्श नागरिक बन सकते हैं।
उन्होंने बच्चों की प्रस्तुतियों की सराहना करते हुए कहा कि ये बच्चे केवल छोटे नहीं बल्कि “सयाने संत” हैं, जो कम उम्र में ही सतगुरु की शिक्षाओं को अपने जीवन में उतार रहे हैं। उन्होंने कहा कि बच्चों में दिखाई देने वाला प्रेम, अनुशासन और विनम्रता परिवारों के त्याग, सत्संग और सेवादारों के सहयोग का परिणाम है।
अपने प्रवचन में श्री अमरजीत सिंह जी ने कहा कि जिस प्रकार गहरे पानी में नाविक की सलाह जरूरी होती है, उसी प्रकार जीवन में माता-पिता और सतगुरु की शिक्षाओं का पालन करना आवश्यक है। उन्होंने बच्चों को माता-पिता का सम्मान करने, मर्यादा में रहने, बाहर के खान-पान से बचने, नियमित अरदास एवं सिमरन करने और संगत से जुड़े रहने की प्रेरणा दी।
उन्होंने बच्चों को मोबाइल, दिखावे और भौतिक आकर्षणों से दूर रहने की सलाह देते हुए बाबा हरदेव सिंह जी महाराज के संदेश “पनीर नहीं तो दाल में खुश हूं” का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि हर परिस्थिति में संतुष्ट और खुश रहना ही सच्ची भक्ति है।
समागम में यह भी बताया गया कि संगत और सेवा बच्चों के व्यक्तित्व को निखारने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। यही कारण है कि निरंकारी मिशन विश्वभर में बाल समागम आयोजित कर बच्चों को आध्यात्मिक एवं नैतिक मूल्यों से जोड़ रहा है।
कार्यक्रम के दौरान विभिन्न भाषाओं में बच्चों द्वारा प्रस्तुत संदेशों ने यह साबित किया कि नई पीढ़ी में आध्यात्मिक चेतना और मानवता के संस्कार लगातार मजबूत हो रहे हैं। उपस्थित संगत ने बच्चों की प्रतिभा, समर्पण और अनुशासन की खुलकर सराहना की।
समागम के अंत में श्री अमरजीत सिंह जी ने सतगुरु माता सुदीक्षा जी महाराज का शुकराना करते हुए कहा कि सतगुरु की कृपा से ही बच्चों में सेवा, प्रेम, विनम्रता और इंसानियत के संस्कार विकसित हो रहे हैं। उन्होंने परिवारों से आग्रह किया कि वे बच्चों को सत्संग, सेवा और संगत से जोड़े रखें ताकि वे आध्यात्मिक और सामाजिक दोनों क्षेत्रों में उत्कृष्टता हासिल कर सकें।
इस अवसर पर स्थानीय मुखी श्री एस.एस. बांगा जी ने सभी बच्चों, अभिभावकों और उपस्थित संगत का धन्यवाद किया। कार्यक्रम में संयोजक श्री नवनीत पाठक जी भी विशेष रूप से उपस्थित रहे।




