SCADA और IoT तकनीक से किसानों को मिलेगी रियल टाइम सिंचाई जानकारी, पंजाब बना देश का पहला पायलट राज्य
खन्ना/लुधियाना, 21 मई:– पंजाब में जल प्रबंधन और कृषि क्षेत्र को आधुनिक बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है। लुधियाना जिले के गांव रौणी में गुरुवार को मॉडर्न कमांड एरिया डेवलपमेंट (MCAD) प्रोजेक्ट को लेकर उच्च स्तरीय जागरूकता कैंप आयोजित किया गया। इस महत्वाकांक्षी परियोजना के तहत 1388 हेक्टेयर क्षेत्र को आधुनिक सिंचाई सुविधाओं से जोड़ा जाएगा। खास बात यह है कि पंजाब देश का पहला पायलट राज्य बना है, जहां यह प्रोजेक्ट शुरू होने जा रहा है।
इस जागरूकता कैंप में जल संसाधन विभाग, जिला प्रशासन लुधियाना, जल शक्ति मंत्रालय भारत सरकार, पंजाब कृषि विश्वविद्यालय (PAU), सेंट्रल वाटर कमीशन और तकनीकी विशेषज्ञों सहित बड़ी संख्या में किसानों ने भाग लिया।
निगरानी इंजीनियर जल संसाधन विभाग मोहाली नवजोत सिंह ने बताया कि इस परियोजना में SCADA और Internet of Things (IoT) जैसी हाईटेक तकनीकों का इस्तेमाल किया जाएगा। किसानों को मोबाइल ऐप के जरिए रियल टाइम सिंचाई संबंधी जानकारी मिलेगी, जिससे पानी की बचत होगी और हर किसान तक समान दबाव के साथ पानी पहुंच सकेगा।
उन्होंने बताया कि इस परियोजना के तहत लुधियाना, फतेहगढ़ साहिब और मलेरकोटला जिलों के छह गांवों को शामिल किया गया है। इनमें लुधियाना के भरथला, रौणी, देवीपुर और मुल्लांपुर, फतेहगढ़ साहिब का पहेड़ी और मलेरकोटला का धीरो माजरा गांव शामिल हैं। इन गांवों में अब तक नहरी सिंचाई की सुविधा उपलब्ध नहीं थी।
अधिकारियों के अनुसार, इस परियोजना से किसानों को बेहतर फसल उत्पादन में मदद मिलेगी और भूजल स्तर को बचाने में भी राहत मिलेगी। नहरी पानी में मौजूद मिनरल फसलों की गुणवत्ता और उत्पादन बढ़ाने में सहायक होंगे।
वहीं अतिरिक्त डिप्टी कमिश्नर खन्ना जशनप्रीत कौर गिल ने कहा कि पंजाब में लगातार गिरते भूजल स्तर को देखते हुए आधुनिक सिंचाई प्रणाली समय की सबसे बड़ी जरूरत बन चुकी है। MCAD प्रोजेक्ट कम पानी में ज्यादा उत्पादन सुनिश्चित करने में मदद करेगा।
जल शक्ति मंत्रालय के सहायक निदेशक अमित लोहान ने कहा कि सरकार जल संरक्षण और आधुनिक कृषि तकनीकों को बढ़ावा देने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। इस परियोजना का उद्देश्य सिंचाई प्रणाली को अधिक प्रभावी बनाना और हर खेत तक समय पर पानी पहुंचाना है।
सेमिनार में विशेषज्ञों ने किसानों को ड्रिप इरिगेशन, स्प्रिंकलर सिस्टम और सेंसर आधारित सिंचाई तकनीकों के बारे में विस्तार से जानकारी दी। साथ ही पाइपलाइन आधारित जल आपूर्ति और डिजिटल मॉनिटरिंग सिस्टम को लागू करने की भविष्य की योजनाओं पर भी चर्चा की गई।
किसान प्रतिनिधियों ने सरकार से आधुनिक सिंचाई तकनीकों के लिए वित्तीय सहायता और तकनीकी सहयोग बढ़ाने की मांग की। उन्होंने कहा कि यदि पर्याप्त सहयोग मिले तो किसान बड़े स्तर पर नई तकनीकों को अपनाने के लिए तैयार हैं।
विशेषज्ञों ने चेतावनी दी कि यदि पानी संरक्षण की दिशा में तुरंत प्रभावी कदम नहीं उठाए गए तो भविष्य में खेती और पीने के पानी दोनों के लिए बड़ा संकट खड़ा हो सकता है। ऐसे में जल प्रबंधन को सामूहिक जिम्मेदारी के रूप में अपनाना जरूरी है।
यह सेमिनार पंजाब में टिकाऊ खेती और बेहतर जल प्रबंधन की दिशा में एक बड़ा सकारात्मक कदम माना जा रहा है, जिससे आने वाले समय में किसानों को व्यापक लाभ मिलने की उम्मीद है।




