चंडीगढ़, 18 जुलाई (नारिंदर चावला) सच्ची आध्यात्मिकता केवल धार्मिक अनुष्ठानों या बाहरी आडम्बरों तक सीमित नहीं है, बल्कि आत्म-मंथन के माध्यम से अपने जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाना ही वास्तविक अध्यात्म है। यह विचार संत निरंकारी मिशन के प्रचारक श्री जगतार कुरील जी ने संत निरंकारी सत्संग भवन, सेक्टर-45, चंडीगढ़ में आयोजित इंग्लिश मीडियम समागम को संबोधित करते हुए व्यक्त किए।
उन्होंने कहा कि यदि परमात्मा का ज्ञान प्राप्त करने के बाद भी मनुष्य के भीतर अहंकार, ईर्ष्या, भेदभाव, निंदा और अन्य विकार बने रहें, तो ऐसी आध्यात्मिकता केवल दिखावा बनकर रह जाती है। सच्ची आध्यात्मिकता वही है, जो व्यक्ति के विचारों, व्यवहार और चरित्र में प्रेम, विनम्रता, समानता तथा मानवता का संचार करे।
श्री कुरील ने श्रद्धालुओं से आत्म-मंथन करने का आह्वान करते हुए कहा कि प्रत्येक व्यक्ति स्वयं से यह प्रश्न करे कि क्या वह वास्तव में आध्यात्मिक जीवन जी रहा है या केवल धार्मिक होने का दावा कर रहा है। उन्होंने कहा कि आत्म-मंथन के माध्यम से ही व्यक्ति अपनी कमियों को पहचानकर उन्हें दूर कर सकता है। जब तक जीवन में व्यवहारिक परिवर्तन नहीं आता, तब तक आध्यात्मिकता अधूरी रहती है।
उन्होंने कहा कि विभिन्न स्थानों पर आयोजित होने वाले समागमों का उद्देश्य केवल सत्संग सुनाना नहीं, बल्कि प्रत्येक मानव के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाना है। सेवा, सुमिरण और सत्संग तभी सार्थक हैं, जब उनके प्रभाव से मनुष्य के भीतर विनम्रता, सहनशीलता, प्रेम और निष्काम सेवा का भाव विकसित हो। यदि इन साधनों के बावजूद व्यक्ति का व्यवहार नहीं बदलता, तो उसे पुनः आत्म-मंथन करने की आवश्यकता है।
अपने प्रवचन में उन्होंने मानव जीवन की तुलना एक पुल से करते हुए कहा कि जिस प्रकार पुल पर स्थायी निवास नहीं बनाया जा सकता, उसी प्रकार यह जीवन भी क्षणभंगुर है। यह दुर्लभ मानव जीवन परमात्मा से जुड़कर आत्मिक मुक्ति प्राप्त करने का सुनहरा अवसर है। इसलिए प्रत्येक व्यक्ति को आत्मज्ञान के प्रकाश में आगे बढ़ते हुए अपने जीवन को सार्थक बनाना चाहिए।
उन्होंने समागम में प्रस्तुत प्रेरणादायी प्रस्तुतियों की सराहना करते हुए कहा कि उनका उद्देश्य केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि सतगुरु माता सुदीक्षा जी महाराज के दिव्य संदेश को जन-जन तक पहुँचाना है। प्रत्येक संत-महात्मा अपने श्रेष्ठ आचरण और जीवन मूल्यों के माध्यम से मिशन का सच्चा प्रचारक बन सकता है।
समागम से पूर्व स्थानीय मुखी श्री एन.के. गुप्ता जी ने प्रचारक श्री जगतार कुरील जी, जोनल इंचार्ज, संयोजक एवं सभी मुखियों का स्वागत एवं धन्यवाद किया। समागम में बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे और सभी ने सतगुरु की शिक्षाओं को अपने जीवन में अपनाने का संकल्प लिया।




