चंडीगढ़, नरिंदर चावला। सतगुरु माता सुदीक्षा जी महाराज के पावन आशीर्वाद से चंडीगढ़ के सेक्टर-34 स्थित मेला ग्राउंड में विशाल निरंकारी संत समागम का आयोजन किया गया। भारी बरसात के बावजूद बड़ी संख्या में श्रद्धालु एवं संत समागम में पहुंचे और निरंकारी राजपिता रमित जी के पावन वचनों का आनंद लिया। वर्षा भी श्रद्धालुओं के उत्साह, श्रद्धा और भक्ति को कम नहीं कर सकी।
समागम के दौरान संतों ने गीतों, भजनों एवं विचारों के माध्यम से सतगुरु की शिक्षाओं को साझा किया। इससे पूरा वातावरण प्रेम, भक्ति और श्रद्धा के भाव से सराबोर हो उठा।
परमात्मा की पहचान है मानव जीवन का उद्देश्य
निरंकारी राजपिता रमित जी ने अपने संबोधन में कहा कि मानव जीवन का वास्तविक उद्देश्य माया, धन-दौलत और शोहरत की चकाचौंध में खो जाना नहीं, बल्कि परमात्मा की पहचान करना है। सतगुरु द्वारा प्रदान किया गया ब्रह्मज्ञान मनुष्य को उसके वास्तविक स्वरूप से परिचित करवाता है और परमात्मा के साथ उसके संबंध का एहसास कराता है।
उन्होंने कहा कि संसार के विभिन्न आकर्षणों में उलझकर मनुष्य कई बार अपने जीवन के मूल उद्देश्य को भूल जाता है। ब्रह्मज्ञान के माध्यम से जब मनुष्य को यह एहसास होता है कि वह परमात्मा का अंश है, तो उसके जीवन को सही दिशा मिलती है और भक्ति में वास्तविक प्रेम एवं समर्पण का भाव उत्पन्न होता है।
बारिश में भी अटूट रहा श्रद्धालुओं का उत्साह
भारी बरसात के आध्यात्मिक भाव को प्रस्तुत करते हुए निरंकारी राजपिता रमित जी ने कहा कि ऐसा प्रतीत हो रहा है मानो बरसात भी संतों के प्रेम और भक्ति में शामिल होने आई हो। जिस प्रकार संत वर्षा में भीग रहे हैं, उसी प्रकार सभी संत परमात्मा के एहसास, भक्ति और सतगुरु के प्रेम में सदैव भीगे रहें।
उन्होंने दातार से प्रार्थना की कि सभी श्रद्धालुओं के जीवन में प्रेम, भक्ति और परमात्मा का एहसास निरंतर बना रहे।
समालखा संत समागम में भाग लेने का आह्वान
समागम के दौरान श्रद्धालुओं से निरंकारी आध्यात्मिक स्थल, समालखा में आयोजित होने वाले वार्षिक संत समागम में बढ़-चढ़कर भाग लेने का आह्वान भी किया गया।
भारी बारिश के बीच आयोजित इस संत समागम ने श्रद्धालुओं के अटूट विश्वास, भक्ति और सतगुरु के प्रति समर्पण का भावपूर्ण संदेश प्रस्तुत किया।




