नई दिल्ली, 6 जून: सोशल मीडिया से शुरू होकर देशव्यापी चर्चा का विषय बनी Cockroach Janata Party (CJP) अब कानूनी विवादों में घिर गई है। दिल्ली के जंतर-मंतर पर आयोजित बड़े प्रदर्शन के बाद संगठन और उससे जुड़े कुछ लोगों के खिलाफ कथित राष्ट्र-विरोधी गतिविधियों के आरोपों को लेकर FIR दर्ज की गई है। मामले की जांच शुरू हो चुकी है और पुलिस प्रदर्शन के दौरान हुई गतिविधियों, भाषणों और सोशल मीडिया पोस्ट की पड़ताल कर रही है।
क्या है पूरा मामला?
Cockroach Janata Party ने शनिवार को दिल्ली के जंतर-मंतर पर बड़ा विरोध प्रदर्शन आयोजित किया था। इस प्रदर्शन में हजारों छात्र, प्रतियोगी परीक्षा अभ्यर्थी और युवा शामिल हुए। प्रदर्शनकारियों ने परीक्षा पेपर लीक, भर्ती प्रक्रियाओं में कथित अनियमितताओं और युवाओं में बढ़ती बेरोजगारी के खिलाफ आवाज उठाई। साथ ही केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग भी की गई।
हालांकि प्रदर्शन के बाद कुछ संगठनों और व्यक्तियों ने आरोप लगाया कि आंदोलन से जुड़े कुछ बयानों और गतिविधियों में राष्ट्र-विरोधी तत्वों का समर्थन दिखाई देता है। इन्हीं आरोपों के आधार पर FIR दर्ज कर जांच शुरू की गई है।
सोशल मीडिया से सड़क तक पहुंचा आंदोलन
Cockroach Janata Party की शुरुआत एक व्यंग्यात्मक ऑनलाइन अभियान के रूप में हुई थी, लेकिन कुछ ही हफ्तों में यह युवाओं के बीच बेहद लोकप्रिय हो गया। संगठन के संस्थापक अभिजीत दीपके ने शिक्षा व्यवस्था, रोजगार और युवाओं से जुड़े मुद्दों को लेकर सरकार पर सवाल उठाए हैं। सोशल मीडिया पर करोड़ों फॉलोअर्स जुटाने के बाद संगठन ने पहली बार बड़े स्तर पर जमीनी प्रदर्शन किया।
प्रदर्शन में क्या हुआ?
जंतर-मंतर पर हुए प्रदर्शन में बड़ी संख्या में युवा राष्ट्रीय ध्वज और किताबें लेकर पहुंचे। आयोजकों ने प्रदर्शन को शांतिपूर्ण रखने की अपील की थी और प्रतिभागियों को किसी भी तरह की हिंसा या उकसावे से दूर रहने के निर्देश दिए गए थे। दिल्ली पुलिस ने सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए थे और कई स्थानों पर बैरिकेडिंग की गई थी।
रिपोर्ट्स के अनुसार कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए कुछ लोगों को एहतियातन हिरासत में भी लिया गया।
सरकार और CJP आमने-सामने
केंद्र सरकार के कुछ नेताओं ने पहले भी Cockroach Janata Party पर सवाल उठाए थे। आरोप लगाए गए कि संगठन को कथित “एंटी-इंडिया नेटवर्क” का समर्थन प्राप्त है। वहीं संगठन के संस्थापक अभिजीत दीपके ने इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए कहा है कि उनका आंदोलन पूरी तरह लोकतांत्रिक और संविधान के दायरे में है।
पुलिस जांच में जुटी
दिल्ली पुलिस अब FIR के आधार पर सभी तथ्यों की जांच कर रही है। जांच एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश करेंगी कि प्रदर्शन के दौरान कोई ऐसा बयान, नारा या गतिविधि हुई थी या नहीं, जिससे राष्ट्रीय सुरक्षा या सार्वजनिक व्यवस्था प्रभावित हो सकती थी। फिलहाल किसी भी व्यक्ति को दोषी नहीं ठहराया गया है और जांच पूरी होने के बाद ही आगे की कानूनी कार्रवाई तय होगी।
युवाओं में क्यों बढ़ रही है CJP की लोकप्रियता?
विशेषज्ञों का मानना है कि परीक्षा घोटालों, भर्ती में देरी और रोजगार संकट जैसे मुद्दों के कारण बड़ी संख्या में युवा इस आंदोलन से जुड़ रहे हैं। यही वजह है कि कुछ ही समय में यह ऑनलाइन अभियान देशभर में चर्चा का केंद्र बन गया है।
(नोट: FIR दर्ज होना किसी व्यक्ति या संगठन के दोषी होने का प्रमाण नहीं होता। यह केवल जांच प्रक्रिया की शुरुआत होती है।)




