नई दिल्ली: भारत में लोगों की सेहत को लेकर एक नई तस्वीर सामने आई है। इंडिया हेल्थ कोटिएंट (IHQ) 2026 रिपोर्ट के अनुसार देश का औसत स्वास्थ्य स्कोर 100 में से 65 दर्ज किया गया है। रिपोर्ट बताती है कि जहां शारीरिक स्वास्थ्य अभी भी लोगों की प्राथमिकता बना हुआ है, वहीं मानसिक और आर्थिक स्वास्थ्य तेजी से महत्वपूर्ण मुद्दे बनकर उभरे हैं।
यह अध्ययन देश के 16 शहरों में 2,600 लोगों की भागीदारी के साथ किया गया, जिसमें स्वास्थ्य को पांच प्रमुख आयामों—शारीरिक, मानसिक, सामाजिक, व्यावसायिक और आर्थिक स्वास्थ्य—के आधार पर परखा गया।
आर्थिक स्वास्थ्य सबसे कमजोर कड़ी
रिपोर्ट में आर्थिक स्वास्थ्य का स्कोर सबसे कम पाया गया। बढ़ती महंगाई, स्वास्थ्य सेवाओं पर बढ़ता खर्च और वित्तीय असुरक्षा लोगों के तनाव का प्रमुख कारण बन रहे हैं। बड़ी संख्या में लोगों ने माना कि वित्तीय दबाव उनकी जीवनशैली और स्वास्थ्य दोनों को प्रभावित कर रहा है।
विशेषज्ञों का कहना है कि आर्थिक अस्थिरता सीधे मानसिक स्वास्थ्य पर असर डालती है, जिससे तनाव, चिंता और उत्पादकता में कमी जैसी समस्याएं बढ़ती हैं।
मानसिक स्वास्थ्य को मिल रही नई पहचान
रिपोर्ट का सबसे महत्वपूर्ण निष्कर्ष यह है कि अब भारतीय नागरिक मानसिक स्वास्थ्य को शारीरिक स्वास्थ्य जितना ही महत्वपूर्ण मानने लगे हैं। तनाव, कार्यस्थल का दबाव और बदलती जीवनशैली के कारण मानसिक स्वास्थ्य को लेकर जागरूकता में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।
हालांकि, बड़ी संख्या में लोगों ने तनाव महसूस करने की बात स्वीकार की, लेकिन अधिकांश लोग अभी भी खुद को “स्वस्थ” मानते हैं। यह स्थिति मानसिक स्वास्थ्य के प्रति बढ़ती जागरूकता और वास्तविक चुनौतियों के बीच अंतर को दर्शाती है।
गैर-मेट्रो शहरों ने महानगरों को छोड़ा पीछे
रिपोर्ट के अनुसार गैर-मेट्रो शहरों में रहने वाले लोगों का स्वास्थ्य स्कोर देश के प्रमुख महानगरों की तुलना में बेहतर पाया गया। विशेषज्ञ इसका कारण अपेक्षाकृत कम जीवनशैली तनाव, बेहतर सामाजिक जुड़ाव और संतुलित जीवनशैली को मानते हैं।
यह निष्कर्ष दर्शाता है कि केवल आधुनिक सुविधाएं ही बेहतर स्वास्थ्य की गारंटी नहीं हैं, बल्कि जीवन की गुणवत्ता और सामाजिक संतुलन भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
युवाओं में बढ़ रही चिंता
25 से 34 वर्ष आयु वर्ग के लोगों का स्वास्थ्य स्कोर सबसे कम दर्ज किया गया। करियर का दबाव, आर्थिक जिम्मेदारियां और भविष्य को लेकर अनिश्चितता इस वर्ग के लिए प्रमुख चुनौतियां बनकर सामने आई हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि युवाओं के लिए मानसिक और वित्तीय स्वास्थ्य पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता है, क्योंकि यही वर्ग देश की कार्यशक्ति का सबसे बड़ा हिस्सा है।
स्वास्थ्य बीमा वालों की स्थिति बेहतर
रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि जिन लोगों के पास स्वास्थ्य बीमा है, उनका समग्र स्वास्थ्य स्कोर बीमा न रखने वालों की तुलना में बेहतर है। स्वास्थ्य बीमा न केवल इलाज के दौरान आर्थिक सुरक्षा प्रदान करता है, बल्कि लोगों को नियमित स्वास्थ्य जांच और बेहतर स्वास्थ्य प्रबंधन के लिए भी प्रेरित करता है।
क्या कहती है रिपोर्ट?
इंडिया हेल्थ कोटिएंट 2026 रिपोर्ट यह स्पष्ट संकेत देती है कि स्वास्थ्य की परिभाषा अब केवल बीमारी से मुक्त रहने तक सीमित नहीं है। मानसिक संतुलन, आर्थिक सुरक्षा, सामाजिक रिश्ते और कार्यस्थल का माहौल भी किसी व्यक्ति की समग्र सेहत को प्रभावित करते हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि भारत को स्वस्थ समाज की दिशा में आगे बढ़ाने के लिए शारीरिक स्वास्थ्य के साथ-साथ मानसिक और आर्थिक स्वास्थ्य पर भी समान रूप से ध्यान देना होगा।




