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उज्ज्वला योजना में बड़ा बदलाव: अब साल में सिर्फ 4 सिलेंडरों पर मिलेगी सब्सिडी, महिलाओं में बढ़ी चिंता

नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना (PMUY) के तहत मिलने वाली एलपीजी सब्सिडी को लेकर बड़ा फैसला लिया है। सरकार ने लाभार्थियों को सालाना मिलने वाले सब्सिडी वाले गैस सिलेंडरों की संख्या 9 से घटाकर 4 कर दी है। इस फैसले का असर देशभर के 10 करोड़ से अधिक उज्ज्वला लाभार्थियों पर पड़ सकता है।

क्या बदला है?

सरकार के नए निर्णय के अनुसार उज्ज्वला योजना के पात्र लाभार्थियों को अब केवल 4 एलपीजी सिलेंडरों पर ही सब्सिडी मिलेगी। इससे पहले यह संख्या 9 थी, जबकि योजना की शुरुआत के समय 12 सिलेंडरों पर सब्सिडी का प्रावधान था।

सरकार ने क्यों लिया यह फैसला?

पेट्रोलियम मंत्रालय के अधिकारियों का कहना है कि यह फैसला लाभार्थियों की औसत गैस खपत को ध्यान में रखते हुए लिया गया है। इसके अलावा अंतरराष्ट्रीय बाजार में एलपीजी की बढ़ती कीमतों और सरकारी सब्सिडी पर बढ़ते वित्तीय बोझ को भी इसकी प्रमुख वजह बताया जा रहा है।

रिपोर्टों के अनुसार वैश्विक बाजार में एलपीजी की लागत बढ़ने से तेल विपणन कंपनियों पर भारी दबाव पड़ा है, जिसके चलते सरकार ने सब्सिडी दायरे को सीमित करने का फैसला किया है।

महिलाओं और गरीब परिवारों में नाराजगी

सरकार के इस फैसले के बाद कई सामाजिक संगठनों और विपक्षी दलों ने चिंता जताई है। ग्रामीण क्षेत्रों और बड़े परिवारों का कहना है कि साल में केवल 4 सिलेंडर उनकी जरूरतों को पूरा करने के लिए पर्याप्त नहीं हैं। ऐसे में बाकी सिलेंडर बाजार मूल्य पर खरीदने से घरेलू बजट पर अतिरिक्त बोझ पड़ेगा।

विपक्ष ने साधा निशाना

फैसले के बाद कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि महंगाई के दौर में गरीब और मध्यम वर्ग के लोगों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ डाला जा रहा है। इस मुद्दे को लेकर राजनीतिक बहस भी तेज हो गई है।

क्या रहेगी सब्सिडी?

सरकार ने स्पष्ट किया है कि पात्र उज्ज्वला लाभार्थियों को प्रति सिलेंडर ₹300 की सब्सिडी मिलती रहेगी, लेकिन यह सुविधा अब केवल 4 सिलेंडरों तक सीमित रहेगी। इसके बाद उपभोक्ताओं को पूरा बाजार मूल्य चुकाना होगा।

आगे क्या?

उज्ज्वला योजना को महिलाओं के स्वास्थ्य और स्वच्छ ईंधन की उपलब्धता के लिए एक महत्वपूर्ण योजना माना जाता है। ऐसे में सब्सिडी वाले सिलेंडरों की संख्या में कटौती का असर ग्रामीण और आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों पर कितना पड़ता है, इस पर आने वाले महीनों में नजर रहेगी।

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