कोलकाता: पश्चिम बंगाल की सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस (TMC) में अंदरूनी मतभेद अब खुलकर सामने आने लगे हैं। पार्टी के वरिष्ठ सांसद और अधिवक्ता कल्याण बनर्जी ने अभिषेक बनर्जी से जुड़े एक मामले में पैरवी करने से इनकार कर दिया है। इसके साथ ही उन्होंने पार्टी प्रमुख ममता बनर्जी को बड़ा संदेश देते हुए कहा कि उन्हें अभिषेक बनर्जी और पुराने वफादार नेताओं में से किसी एक को चुनना होगा।
क्या है पूरा मामला?
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, कल्याण बनर्जी लंबे समय से पार्टी के भीतर कुछ फैसलों और अभिषेक बनर्जी के बढ़ते प्रभाव को लेकर नाराज बताए जा रहे हैं। हालिया विवाद के बीच उन्होंने अभिषेक बनर्जी से जुड़े मामले में कानूनी प्रतिनिधित्व से खुद को अलग कर लिया।
बताया जा रहा है कि उन्होंने ममता बनर्जी के सामने अपनी नाराजगी जाहिर करते हुए साफ कहा कि पार्टी को पुराने नेताओं और नए नेतृत्व के बीच संतुलन बनाना होगा।
अभिषेक बनर्जी पर बढ़ा दबाव
अभिषेक बनर्जी इन दिनों एक कथित हस्ताक्षर जालसाजी मामले को लेकर राजनीतिक और कानूनी चुनौतियों का सामना कर रहे हैं। मामले की जांच जारी है और इसे लेकर पश्चिम बंगाल की राजनीति में लगातार बयानबाजी हो रही है।
TMC के लिए क्यों अहम है यह विवाद?
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि कल्याण बनर्जी जैसे वरिष्ठ नेता की नाराजगी पार्टी नेतृत्व के लिए चिंता का विषय हो सकती है। यदि मतभेद बढ़ते हैं तो इसका असर संगठन की एकजुटता और भविष्य की रणनीति पर पड़ सकता है।
ममता बनर्जी के सामने चुनौती
ममता बनर्जी के सामने अब पार्टी के भीतर बढ़ती असहमति को संभालने की चुनौती है। विपक्ष इस पूरे घटनाक्रम को TMC में नेतृत्व संघर्ष के रूप में पेश कर रहा है, जबकि पार्टी की ओर से अभी तक कोई विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।
राजनीतिक गलियारों में इस घटनाक्रम को TMC के अंदर बढ़ती खींचतान और शक्ति संतुलन की लड़ाई के रूप में देखा जा रहा है।




